Apr 16, 2012

घटा


ये भरे-भरे बादल, 
ये लदी-लदी घटा..
शांत-शीतल-चंचल, 
अहा! ठंडी हवा...!

चहुँ ओर, वातावरण,

ओढ़े सुन्दर आवरण..
मन-तन, करें चिंतन,
पक्षी-पौधे, रमें इक धुन !

ऐसे में, तुम और मैं, 

एक ही सुर, एक ही लय..
गायें गीत, मधुर संगीत,    
अमर रहे यह प्रेम-रीत 

- फ़नकार

4 comments:

  1. guess its the inspiration from the recent romantic drive you two had!! excellent composition yet again Siddharth sahib!
    Cheers!!

    ReplyDelete
  2. By the way kaali ghataa dekh kar hamara Bruno to darr jaata hai .......... lol
    Waise, on the serious side, this is my favourite setting

    ReplyDelete